वेद: सही या गलत
मैने हाल ही में वेदों को पढ़ना शुरू किया है और जिसकी शुरूवात मैने ऋग्वेद से करी है। वेदों को पढ़ने का मेरा शुरू से ही काफी मन था और इसका सबसे बड़ा कारण है वेदों के बारे में जो हमने सुना है अब तक क्या वो वाकई सही है और क्यों माननीय दयानंद सरस्वती जी ने आजादी से पूर्व हमे वेदों की ओर लौटो का नारा दिया और क्यों उनके विरोधी वेदों को अंधविश्वास और बेकार बताते हैं। हाल ही में मै ऋग्वेद पढ़ रही हूं और इसको अब तक मैने जितना भी पढ़ा है उससे मुझे बस यही बात समझ आई है कि वेद कोई साधारण या कोई बहुत ही महान पुस्तक न होकर वो पुस्तक है जो हमे वैदिक सभ्यता के बारे में बताती है जिसका मुख्य उद्देश्य आज की ओर भविष्य की पीढ़ी को यह बताना है कि हमारी संस्कृति की vedic सभ्यता कैसी थी और क्या होता था उस समय कौनसे देव पूजे जाते थे और तब की इकोनॉमी कैसे काम करती थीं। जितना मैने इसे पढ़ा और समझा है उसके मुताबिक वैदिक सभ्यता की शुरुवात धार्मिक कार्यों से होकर और उन्ही से संबंधित कार्यों पर समाप्त होती थी। जिसमे ईश्वर पंचतत्व, अश्विन कुमार और उषा देवी प्रमुख थी। जिसमे महानता इंद्र देव की है। हमे आज तक vedic सभ्यत...